1.#Opinion: Saturday, 28 Oct 2023 06:00. 3308 // 1. #PMINDIA: News Updates: PM’s address at centenary birth year celebration of Lt. Shri Arvind Bhai Mafatlal in Chitrakoot, MP: 27 Oct 2023: Print News. ///
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1.#Opinion: Saturday, 28 Oct 2023 06:00. 3308 //
1. #PMINDIA: News Updates: PM’s address at centenary birth year celebration of Lt. Shri Arvind Bhai Mafatlal in Chitrakoot, MP: 27 Oct 2023: Print News. ///
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VIDEO: PM Modi attends centenary birth year celebration of Lt. Shri Arvind Bhai Mafatlal in Chitrakoot, MP
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जय गुरुदेव! मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्रीमान मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री भाई शिवराज जी, सद्गुरु सेवासंघ ट्रस्ट के सभी सदस्यगण, देवियों और सज्जनों!
आज चित्रकूट की इस पावन पुण्यभूमि पर मुझे पुन: आने का अवसर मिला है। ये वो अलौकिक क्षेत्र है, जिसके बारे में हमारे संतों ने कहा है-चित्रकूट सब दिन बसत, प्रभु सिय लखन समेत! अर्थात्, चित्रकूट में प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ नित्य निवास करते हैं। यहां आने से पहले अभी मुझे श्री रघुबीर मंदिर और श्रीराम जानकी मंदिर में दर्शन का सौभाग्य भी मिला और हेलीकॉप्टर से ही मैंने कामदगिरि पर्वत को भी प्रणाम किया। मैं पूज्य रणछोड़दास जी और अरविंद भाई की समाधि पर पुष्प अर्पित करने गया था। प्रभु श्रीराम जानकी के दर्शन, संतों का मार्गदर्शन, और संस्कृत महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा वेदमंत्रों का ये अद्भुत गायन, इस अनुभव को, इस अनुभूति को वाणी से व्यक्त करना कठिन है। मानव सेवा के महान यज्ञ का हिस्सा बनाने का और उसके लिए श्री सद्गुरु सेवासंघ का भी आज मैं सभी पीड़ित, शोषित, गरीब, आदिवासियों की तरफ से आभार व्यक्त करता हूं। मुझे विश्वास है कि जानकीकुंड चिकित्सालय के जिस न्यू विंग का आज लोकार्पण हुआ है, इससे लाखों मरीजों को नया जीवन मिलेगा। आने वाले समय में, सद्गुरु मेडिसिटी में गरीबों की सेवा के इस अनुष्ठान को नया विस्तार मिलेगा। आज इस अवसर पर अरविंद भाई की स्मृति में भारत सरकार ने विशेष स्टैम्प भी रिलीज़ किया है। ये पल अपने आप में हम सबके लिए गौरव का पल है, संतोष का पल है, मैं आप सबको इसके लिए बधाई देता हूँ।
साथियों,
कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में जो उत्तम काम करता है, उसकी सराहना तो होती है। समकालीन लोग सराहना भी करते हैं लेकिन, जब साधना असाधारण होती है, तो उसके जीवन के बाद भी कार्यों का विस्तार होता रहता है। मुझे खुशी है कि अरविंद भाई का परिवार उनकी परमार्थिक पूंजी को लगातार समृद्ध कर रहा है। खासकर, भाई ‘विशद’ बहन ‘रूपल’ जिस तरह उनके सेवा अनुष्ठानों को नई ऊर्जा के साथ ऊंचाई दे रहे हैं, मैं इसके लिए उन्हें और परिवार के सभी सदस्यों को विशेष तौर पर बधाई देता हूँ। अब अरविंद भाई तो उद्योग जगत के व्यक्ति थे। मुंबई का हो, गुजरात का हो, पूरा बड़ा उनका औद्योगिक कॉरपोरेट वर्ल्ड में बहुत बड़ा प्रतिभा, प्रतिष्टा और विशद चाहते तो ये जन्म शताब्दी का कार्यक्रम मुंबई में कर सकते थे। बड़ी आन बान शान से होता, लेकिन सदगुरु के प्रति समर्पण देखिए कि जैसे अरविंद भाई ने अपना जीवन यहीं त्याग किया था, शताब्दी के लिए भी इस जगह को चुना गया, और इसके लिए संस्कार भी होते हैं, सोच भी होती है, समर्पण भी होता है, तब जाकर होता है। पूज्य संतगण यहां बहुत बड़ी तादाद में हमें आशीर्वाद देने आए हैं। यहां अनेक परिवारजन भी बैठे हैं। चित्रकूट के बारे में कहा गया है- कामद भे गिरि राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत विषादा॥ अर्थात्, चित्रकूट के पर्वत, कामदगिरि, भगवान राम के आशीर्वाद से सारे कष्टों और परेशानियों को हरने वाले हैं। चित्रकूट की ये महिमा यहाँ के संतों और ऋषियों के माध्यम से ही अक्षुण्ण बनी हुई है। और, पूज्य श्री रणछोड़दास जी ऐसे ही महान संत थे। उनके निष्काम कर्मयोग ने मुझ जैसे लक्षावधी लोगों को हमेशा प्रेरित किया है। और जैसा सब ने उल्लेख किया, उनका ध्येय और बड़ा सरल शब्दों में भूखे को भोजन, वस्त्रहीन को वस्त्र, दृष्टिहीन को दृष्टि। इसी सेवा मंत्र के साथ पूज्य गुरुदेव पहली बार 1945 में चित्रकूट आए थे, और 1950 में उन्होंने यहाँ पहले नेत्र यज्ञ का आयोजन कराया था। इसमें सैकड़ों मरीजों की सर्जरी हुई थी, उन्हें नई रोशनी मिली थी।
आज के समय हमें ये बात सामान्य लगती होगी। लेकिन, 7 दशक पहले, ये स्थान लगभग पूरी तरह से वनक्षेत्र था। यहाँ न सड़कों की सुविधा थी, न बिजली थी, न जरूरी संसाधन थे। उस समय इस वनक्षेत्र में ऐसे बड़े संकल्प लेने के लिए कितना साहस, कितना आत्मबल और सेवा भाव की क्या पराकाष्ठा होगी तब ये संभव होगा। लेकिन जहां पूज्य रणछोड़दास जी जैसे संत की साधना होती है, वहाँ संकल्पों का सृजन ही सिद्धि के लिए होता है। आज इस तपोभूमि पर हम सेवा के ये जितने बड़े-बड़े प्रकल्प देख रहे हैं, वो उसी ऋषि के संकल्प का परिणाम हैं। उन्होंने यहाँ श्रीराम संस्कृत विद्यालय की स्थापना की। कुछ ही वर्ष बाद श्रीसद्गुरु सेवासंघ ट्रस्ट का गठन किया। जहां कहीं भी विपदा आती थी, पूज्य गुरुदेव उसके सामने ढाल बनकर खड़े हो जाते थे। भूकंप हो, बाढ़ हो, सूखे से ग्रस्त इलाकों में उनके प्रयासों से, उनके आशीर्वाद से कितने ही गरीबों को नया जीवन मिला। यही हमारे देश की विशेषता है, जो स्व से ऊपर उठकर समष्टि के लिए समर्पित रहने वाले महात्माओं को जन्म देती है।
मेरे परिवारजनों,
संतों का स्वभाव होता है कि जो उनका संग पाता है, उनका मार्गदर्शन पाता है, वो खुद संत बन जाता है। अरविंद भाई का पूरा जीवन इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है। अरविंद जी वेशभूषा से भले ही एक बिलकुल सामान्य जीवन जीते थे। सामान्य व्यक्ति दिखते थे, लेकिन भीतर से उनका जीवन एक तपे हुये संत की तरह था। पूज्य रणछोड़दास जी की अरविंद भाई से, बिहार में आए भीषण अकाल के दौरान मुलाकात हुई। संत के संकल्प और सेवा की सामर्थ्य कैसे, इस संगम के उससे सिद्धि के कैसे-कैसे आयाम स्थापित हुये, ये आज हमारे सामने है।
आज जब हम अरविंद भाई की जन्मशताब्दी मना रहे हैं, तो ये जरूरी है कि हम उनकी प्रेरणाओं को आत्मसात करें। उन्होंने जो भी ज़िम्मेदारी उठाई, उसे शत-प्रतिशत निष्ठा से पूरा किया। उन्होंने इतना बड़ा औद्योगिक साम्राज्य खड़ा किया। मफ़तलाल ग्रुप को एक नई ऊंचाई दी। ये अरविंद भाई ही थे, जिन्होंने देश का पहला पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स स्थापित किया था। आज देश की अर्थव्यवस्था में और सामान्य मानवी के जीवन में अहम भूमिका निभाने वाली कई कंपनियों की नींव में उन्हीं की दृष्टि, उन्हीं की सोच, उन्ही का परिश्रम है। यहाँ तक कि, कृषि के क्षेत्र में भी उनके काम की काफी सराहना होती है। भारतीय एग्रो-इंडस्ट्रीज़ फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष के तौर पर उनके काम को लोग आज भी याद करते हैं। भारत की टेक्सटाइल जैसी पारंपरिक इंडस्ट्री का गौरव लौटाने में भी उनकी एक बहुत बड़ी भूमिका थी। देश के बड़े-बड़े बैंकों को, बड़ी-बड़ी संस्थाओं को भी उन्होंने नेतृत्व दिया। उनके काम ने, उनके परिश्रम और प्रतिभा ने औद्योगिक जगत के साथ-साथ समाज पर एक अलग छाप छोड़ी है। देश और दुनिया के कितने ही बड़े अवार्ड और सम्मान अरविंद भाई को मिले। द लायंस ह्युमेनीटेरियन अवार्ड, सिटिज़न ऑफ बॉम्बे अवार्ड, सर जहाँगीर गांधी गोल्ड मेडल फॉर इंडस्ट्रियल पीस, ऐसे अनेकों सम्मान देश के लिए अरविंद भाई के योगदान के प्रतीक हैं।
मेरे परिवारजनों,
हमारे यहाँ कहा जाता है- उपार्जितानां वित्तानां त्याग एव हि रक्षणम्॥ अर्थात्, हमारी सफलता का,
हमारे कमाए धन का सबसे प्रभावी संरक्षण त्याग से ही होता है। अरविंद भाई ने इस विचार को मिशन बनाकर आजीवन काम किया। आज आपके ग्रुप के द्वारा, श्री सद्गुरु सेवा ट्रस्ट, मफ़तलाल फ़ाउंडेशन, रघुबीर मंदिर ट्रस्ट, श्री रामदास हनुमानजी ट्रस्ट, जैसी कितनी ही संस्थाएं काम कर रही हैं। जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, ब्लाइंड पीपल एसोसिएशन, चारुतर आरोग्य मण्डल जैसे समूह और संस्थान सेवा के अनुष्ठान को आगे बढ़ा रहे हैं। आप देखिए, रघुबीर मंदिर अन्नक्षेत्र में लाखों लोगों की अन्नसेवा, लाखों संतों को यहाँ मासिक राशन किट की व्यवस्था, गुरुकुल में हजारों बच्चों की शिक्षा-दीक्षा, जानकीकुंड के चिकित्सालय में लाखों मरीजों का इलाज, ये कोई सामान्य प्रयास नहीं है। ये अपने आप में भारत की उस आत्मशक्ति का सबूत है, जो हमें निष्काम कर्म की ऊर्जा देती है, जो सेवा को ही साधना मानकर सिद्धि के अनुपम अनुष्ठान करती है। आपके ट्रस्ट द्वारा यहां ग्रामीण महिलाओं को ग्रामीण उद्योग की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। ये women-led development के देश के प्रयासों को गति देने में मदद कर रहा है।
साथियों
मुझे ये जानकर खुशी होती है कि सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय आज देश-दुनिया के बेहतर eye hospitals में अपनी जगह बना चुका है। कभी ये अस्पताल केवल 12 बेडों के साथ शुरू हुआ। आज यहाँ हर साल करीब 15 लाख रोगियों का इलाज होता है। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय के कामों से मैं इसलिए भी विशेष रूप से परिचित हूँ क्योंकि इसका लाभ मेरी काशी को भी मिला है। काशी में आपके द्वारा चलाए जा रहे “स्वस्थ्य दृष्टि-समृद्ध काशी अभियान” इससे कितने ही बुजुर्गों की सेवा हो रही है। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय द्वारा अब तक बनारस और उसके आसपास के करीब साढ़े 6 लाख लोगों की डोर-टु-डोर स्क्रीनिंग हुई है! 90 हजार से ज्यादा मरीजों को स्क्रीनिंग के बाद कैंप के लिए रिफ़र भी किया गया। बड़ी संख्या में मरीजों की सर्जरी भी हुई है। कुछ समय पहले मुझे इस अभियान के लाभार्थियों से काशी में मिलने का भी अवसर मिला था। मैं मेरी काशी के उन सभी लोगों की तरफ से ट्रस्ट और सद्गुरु नेत्र चिकित्सा और सभी डॉक्टर्स और उनके साथियों का, आज जब आपके बीच आया हूं, मैं विशेष रूप से आप सबका आभार व्यक्त करता हूं।
मेरे परिवारजनों,
संसाधन सेवा की आवश्यकता है, लेकिन समर्पण उसकी प्राथमिकता है। अरविंद भाई की सबसे खास बात यही थी कि वो विषम से विषम परिस्थितियों में भी खुद जमीन पर उतरकर काम करते थे। राजकोट हो, अमदाबाद हो, मैंने गुजरात के कोने-कोने में उनका काम देखा है। मुझे याद है, मेरी आयु बहुत छोटी थी। सदगुरू जी के दर्शन करने का तो मुझे सौभाग्य नहीं मिला, लेकिन अरविंद भाई का संबंध मेरा रहा। मैं पहली बार अरविंद भाई को मिला कहां, तो गुजरात के साबरकांठा जिले के आदिवासी क्षेत्र भिलौड़ा, बड़ा भयंकर अकाल था और हमारे एक डॉक्टर मणिकर जी थे जिनका अरविंद भाई से अच्छा परिचय था। और मैं वहां उस आदिवासी भाई-बहनों का अकाल पीड़ितों की सेवा में काम करता था। इतनी भयंकर गर्मी उस क्षेत्र में, अरविंद भाई वहां आए, पूरा दिन रहे और स्वयं ने जाकर के सेवायग्न में हिस्सा लिया और काम को बढ़ाने के लिए जो आवश्यकता थी उसकी जिम्मेदारी भी ली। मैंने स्वयं उनको गरीबों के प्रति उनकी संवेदना, काम करने की उनकी धग्स खुद ने देखा है, अनुभव किया है। हमारे गुजरात में भी आदिवासी क्षेत्र दाहोद में आदिवासी समाज के कल्याण के लिए जो काम किया है, लोग आज भी याद करते हैं। और आपको हैरानी होगी, हमारे यहां normally गुजरात में भी और बाकी जगह भी जहां खेती होती है उसको खेत बोलते हैं। लेकिन दाहोद के लोग उसे फूलवाड़ी बोलते हैं। क्योंकी सदगुरु ट्रस्ट के माध्यम से वहां के किसानों को खेती करने का नया रूप सिखाया गया, वो फूलों की खेती करने लगे, और फूलवाड़ी के रूप में जाने जाते हैं। और आज उनके फूलों की पैदावार मुंबई जाती है। इस सबमें अरविंद भाई के प्रयासों की बड़ी भूमिका है। मैंने देखा था, उनमें सेवा को लेकर एक अलग ही जुनून था। वो कभी अपने आपको दाता कहलाना पसंद नहीं करते थे, और न ही ये जताने देते थे कि वो किसी के लिए कुछ कर रहे हैं। कोई दूसरा भी अगर उनके साथ सहयोग की इच्छा जताता था तो वो कहते थे कि आपको पहले काम देखने के लिए वहां रूबरू आना पड़ेगा। उस प्रोजेक्ट को कितना ही कष्ट क्यों न हो आपको आना पड़ेगा। और तब जाकर के आप सहयोग के लिए सोचिए उसके पहले नहीं। उनके काम को, उनके व्यक्तिव को जितना मैंने जाना है, उससे मेरे मन में उनके मिशन के लिए एक इमोशनल कनेक्ट बन गया है। इसलिए मैं अपने आपको इस सेवा अभियान के एक समर्थक एक पुरस्कृत करने वाला और एक प्रकार से आपका सहयात्री के रूप में अपने आपको मैं देखता हूं।
मेरे परिवारजनों,
चित्रकूट की धरती हमारे नाना जी देशमुख की भी कर्मस्थली है। अरविंद भाई की तरह ही जनजातीय समाज की सेवा में उनके प्रयास भी हम सबके लिए बड़ी प्रेरणा हैं। आज उन आदर्शों पर चलते हुये देश जनजातीय समाज के कल्याण के लिए पहली बार इतने व्यापक प्रयास कर रहा है। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस पर देश ने जनजातीय गौरव दिवस की परंपरा शुरू की है। आदिवासी समाज के योगदान को, उनकी विरासत को गौरव देने के लिए देश भर में ट्राइबल म्यूज़ियम्स भी बनाए जा रहे हैं। जनजातीय बच्चे अच्छी शिक्षा लेकर देश के विकास में योगदान दें, इसके लिए एकलव्य आवासीय विद्यालय खोले जा रहे हैं। वन सम्पदा कानून जैसे नीतिगत फैसले भी आदिवासी समाज के अधिकारों को संरक्षण देने का माध्यम बने हैं। हमारे इन प्रयासों से आदिवासी समाज को गले लगाने और उसके लिए हम सबके लिए प्रेरणा आदिवासियों को गले लगाने वाले प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद भी इसके साथ जुड़ा हुआ है। यही आशीर्वाद समरस और विकसित भारत के लक्ष्य तक हमारा मार्गदर्शन करेगा। मैं फिर एक बार इस शताब्दी के पावन अवसर पर अरविंद भाई की इन महान तपस्या को श्रद्धपूर्वक नमन करता हूं। उनका कार्य, उनका जीवन, हम सबको प्रेरणा देता रहे, सदगुरु के आशीर्वाद हम पर बने रहें, इसी एक भाव के साथ, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद। जय सियाराम।
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2.#PM’s address at Tulsi Peeth Programme in Chitrakoot, Madhya Pradesh: 27 Oct, 2023: Print News.
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VIDEO: PM Modi at Tulsi Peeth Programme in Chitrakoot, Madhya Pradesh
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नमो राघवाय !
नमो राघवाय !
हम सबको आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित पूजनीय जगद्गुरू श्री रामभद्राचार्य जी, यहां पधारे हुए सभी तपस्वी वरिष्ठ संतगण, ऋषिगण, मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री भाई शिवराज जी, उपस्थित अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!
मैं चित्रकूट की परम पावन भूमि को पुन: प्रणाम करता हूँ। मेरा सौभाग्य है, आज पूरे दिन मुझे अलग-अलग मंदिरों में प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर मिला, और संतों का आशीर्वाद भी मिला है। विशेषकर जगद्गुरू रामभद्राचार्य जी का जो स्नेह मुझे मिलता है, वो अभीभूत कर देता है। सभी श्रद्धेय संतगण, मुझे खुशी है कि आज इस पवित्र स्थान पर मुझे जगद्गुरू जी की पुस्तकों के विमोचन का अवसर भी मिला है। अष्टाध्यायी भाष्य, रामानन्दाचार्य चरितम्, और भगवान कृष्ण की राष्ट्रलीला, ये सभी ग्रंथ भारत की महान ज्ञान परंपरा को और समृद्ध करेंगे। मैं इन पुस्तकों को जगद्गुरू जी के आशीर्वाद का एक और स्वरूप मानता हूं। आप सभी को मैं इन पुस्तकों के विमोचन पर बधाई देता हूँ।
मेरे परिवारजनों,
अष्टाध्यायी भारत के भाषा विज्ञान का, भारत की बौद्धिकता का और हमारी शोध संस्कृति का हजारों साल पुराना ग्रंथ है। कैसे एक-एक सूत्र में व्यापक व्याकरण को समेटा जा सकता है, कैसे भाषा को ‘संस्कृत विज्ञान’ में बदला जा सकता है, महर्षि पाणिनी की ये हजारों वर्ष पुरानी रचना इसका प्रमाण है। आप देखेंगे, दुनिया में इन हजारों वर्षों में कितनी ही भाषाएँ आईं, और चली गईं। नई भाषाओं ने पुरानी भाषाओं की जगह ले ली। लेकिन, हमारी संस्कृत आज भी उतनी ही अक्षुण्ण, उतनी ही अटल है। संस्कृत समय के साथ परिष्कृत तो हुई, लेकिन प्रदूषित नहीं हुई। इसका कारण संस्कृत का परिपक्व व्याकरण विज्ञान है। केवल 14 माहेश्वर सूत्रों पर टिकी ये भाषा हजारों वर्षों से शस्त्र और शास्त्र, दोनों ही विधाओं की जननी रही है। संस्कृत भाषा में ही ऋषियों के द्वारा वेद की ऋचाएँ प्रकट हुई हैं। इसी भाषा में पतंजलि के द्वारा योग का विज्ञान प्रकट हुआ है। इसी भाषा में धन्वंतरि और चरक जैसे मनीषियों ने आयुर्वेद का सार लिखा है। इसी भाषा में कृषि पाराशर जैसे ग्रन्थों ने कृषि को श्रम के साथ-साथ शोध से जोड़ने का काम किया। इसी भाषा में हमें भरतमुनि के द्वारा नाट्यशास्त्र और संगीतशास्त्र का उपहार मिला है। इसी भाषा में कालिदास जैसे विद्वानों ने साहित्य के सामर्थ्य से विश्व को हैरान किया है। और, इसी भाषा में अंतरिक्ष विज्ञान, धनुर्वेद और युद्ध-कला के ग्रंथ भी लिखे गए हैं। और ये तो मैंने केवल कुछ ही उदाहरण दिये हैं। ये लिस्ट इतनी लंबी है कि आप एक राष्ट्र के तौर पर भारत के विकास का जो भी पक्ष देखेंगे, उसमें आपको संस्कृत के योगदान के दर्शन होंगे। आज भी दुनिया की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत पर रिसर्च होती है। अभी हमने ये भी देखा है कि कैसे भारत को जानने के लिए लिथुआनिया देश की राजदूत ने भी संस्कृत भाषा सीखी है। यानि संस्कृत का प्रसार पूरी दुनिया में बढ़ रहा है।
साथियों,
गुलामी के एक हजार साल के कालखंड में भारत को तरह-तरह से जड़ों से उखाड़ने का प्रयास हुआ। इन्हीं में से एक था- संस्कृत भाषा का पूरा विनाश। हम आजाद हुए लेकिन जिन लोगों में गुलामी की मानसिकता नहीं गई, वो संस्कृत के प्रति बैर भाव पालते रहे। कहीं कोई लुप्त भाषा का कोई शिलालेख मिलने पर ऐसे लोग उसका महिमा-मंडन करते हैं लेकिन हजारों वर्षों से मौजूद संस्कृत का सम्मान नहीं करते। दूसरे देश के लोग मातृभाषा जानें तो ये लोग प्रशंसा करेंगे लेकिन संस्कृत भाषा जानने को ये पिछड़ेपन की निशानी मानते हैं। इस मानसिकता के लोग पिछले एक हजार साल से हारते आ रहे हैं और आगे भी कामयाब नहीं होंगे। संस्कृत केवल परम्पराओं की भाषा नहीं है, ये हमारी प्रगति और पहचान की भाषा भी है। बीते 9 वर्षों में हमने संस्कृत के प्रसार के लिए व्यापक प्रयास किए हैं। आधुनिक संदर्भ में अष्टाध्यायी भाष्य जैसे ग्रंथ इन प्रयासों को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
मेरे परिवारजनों,
रामभद्राचार्य जी हमारे देश के ऐसे संत है, जिनके अकेले ज्ञान पर दुनिया की कई यूनिवर्सिटीज़ स्टडी कर सकती हैं। बचपन से ही भौतिक नेत्र न होने के बावजूद आपके प्रज्ञा चक्षु इतने विकसित हैं, कि आपको पूरे वेद-वेदांग कंठस्थ हैं। आप सैकड़ों ग्रन्थों की रचना कर चुके है। भारतीय ज्ञान और दर्शन में ‘प्रस्थानत्रयी’
को बड़े-बड़े विद्वानों के लिए भी कठिन माना जाता है। जगद्गुरू जी उनका भी भाष्य आधुनिक भाषा में लिख चुके है। इस स्तर का ज्ञान, ऐसी मेधा व्यक्तिगत नहीं होती। ये मेधा पूरे राष्ट्र की धरोहर होती है। और इसीलिए, हमारी सरकार ने 2015 में स्वामी जी को पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।
साथियों,
स्वामी जी जितना धर्म और आध्यात्म के क्षेत्र में सक्रिय रहते है, उतना ही समाज और राष्ट्र के लिए भी मुखर रहते है। मैंने जब स्वच्छ भारत अभियान के 9 रत्नों में आपको नामित किया था, तो वो ज़िम्मेदारी भी आपने उतनी ही निष्ठा से उठाई थी। मुझे खुशी है कि स्वामी जी ने देश के गौरव के लिए जो संकल्प किए थे, वो अब पूरे हो रहे हैं। हमारा भारत अब स्वच्छ भी बन रहा है, और स्वस्थ भी बन रहा है। माँ गंगा की धारा भी निर्मल हो रही है। हर देशवासी का एक और सपना पूरा करने में जगद्गुरू रामभद्राचार्य जी की बहुत बड़ी भूमिका रही है। अदालत से लेकर अदालत के बाहर तक जिस राम-मंदिर के लिए आपने इतना योगदान दिया, वो भी बनकर तैयार होने जा रहा है। और अभी दो दिन पूर्व ही मुझे अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। इसे भी मैं अपना बहुत बड़ा सौभाग्य मानता हूं। सभी संतगण, आजादी के 75 वर्ष से आजादी के 100 वर्ष के सबसे अहम कालखंड को यानि 25 साल, देश जो अब से अमृतकाल के रूप में देख रहा है। इस अमृतकाल में देश, विकास और अपनी विरासत को साथ लेकर चल रहा है। हम अपने तीर्थों के विकास को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। चित्रकूट तो वो स्थान है जहां आध्यात्मिक आभा भी है, और प्राकृतिक सौन्दर्य भी है। 45 हजार करोड़ रुपए की केन बेतवा लिंक परियोजना हो, बुंदेलखंड एक्स्प्रेसवे हो, डिफेंस कॉरिडॉर हो, ऐसे प्रयास इस क्षेत्र में नई संभावनाएं बनाएंगे। मेरी कामना और प्रयास है, चित्रकूट, विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचे। एक बार फिर पूज्य जगद्गुरू श्री रामभद्राचार्य जी को मैं आदरपूर्वक प्रणाम करता हूं। उनके आशीर्वाद हम सबको प्रेरणा दें, शक्ति दें और उनका जो ज्ञान का प्रसाद है वो हमें निरंतर मार्गदर्शन करता रहे। इसी भावना को प्रकट करते हुए मैं ह्दय से आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।
जय सिया-राम।
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###OPINION: PEOPLE OF BHARATHAM POSITIVE:
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1. SANATANA DHARMA, OTHERWISE KNOWN AS HINDUISM IS ETERNAL, WHOLE UNIVERSE IS EXISTING IN THIS TRUTH
2. EVER EXISTING
3. THERE IS NO SPACE FOR ADHARMA
4. ALL DEMONIC ELEMENTS DEMOLISHED BY DHARMA
5. SO NO QUESTION EVIL ASURIC DEMONIC FRAGMENT'S BARKING, THEY WILL BE ULTIMATELY BURNED AND DESTROYED BY NATURE.
6. PURE CONSCIOUSNESS IS DIVINE AND SUPREME, ALL OTHERS MEANINGLESS
7. NATURE IS ABOVE ALL, EVER EXISTING, ALL OTHERS MEANINGLESS.
8. THE CONTENT OF SO-CALLED HOLY BOOK IS NO HOLY AT ALL, AS IT PREACHES HATRED AND DESTRUCTION OF OTHER MANKIND, RELIGIOUS CONVERSIONS AND LIES OF UNCIVILIZED MATERIALS
9. CHRISTIANITY IS EQUALLY DEMONSTRATED CRUELTY, THE SO-CALLED HOLY BOOK FULL OF LIES
10. BOTH ARE NOT RELIGIONS BUT SAMPRADAYA (ILLITERATE MAN MADE, NOT BASED ON DHARMA
11. THE CULTURE OF BHARATHAM BASED ON UPANISHADS AND FULL OF REALISATION TEXTS ARE PRODUCED BY GREAT RISHIS OF BHARATHAM
12. IN THIS MATERIALISTIC DESTRUCTIVE MINDED UNIVERSE, NO RELIGIONS COMPARABLE OR ABOVE SANATANA DHARMA OF BHARATHAM.
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Opinion :
1.( i.n.d.i.a.)all stupid "GHAMMANDY"union of idiots, dynasty rascals, feudalists, congress, communists, latest announcement the caste census, is dangerous and divisive Hindus politics, and Muslim Christians vote bank politics, people of Bharat awake and stop this attempt by kick these parties out of politics.( nehru of congress used this Adharma since independence followed by dynasty politics indira,rajiv,italian bahu, and now her stupid son and daughter)
1.1. Congress, a donkey party, its so called daydreaming stupid leader Rahul Vinci, Rahul Gandi, frequent visit to foreign countries, to abuse PM of this Nation, and Sanatana Dharma -exceeded all limits this time, his party and his family to be "condemned" and kicked away from politics, people should awake and realize the danger.
2. Congress & Communists destroyed this holy Nation Sanatana Dharama; the imported stupid secularism degenerated this Nation Ancient Culture and Civilization
3. Till 2014 nation was ruled by corrupt idiots,and all regions too, Dynasty rule dominated than Nation interests.
4. Brushing away mainstream population sides and Muslims and Christians become political parties vote banks.
5. Communists openly abused our ancient culture, Upanishads, Ramayana, Mahabharata, Bhagavtham and daites.
6. The communists next donkey group, latest stunt of America visit and the comedy programmed namely Kerala sabha!? these buggers destroyed Kerala in all and joining with radical Islam soon they will be eliminated, people of Kerala get up from donkey thoughts, otherwise Kerala shrink to extinct in all way.
7. Communists are danger to our civilization, their lunatic theories disappeared throughout the world, Time has come crush them, and eliminate them from our nation, they are danger to this holy nation.
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NOTE:
1. POLITICIANS (THOSE IGNORANT AND DEMONIC NATURED) ARE NOT THE AUTHORITY TO OPEN THEIR UGLY FOUL MOUTH AND UTTER NONSENSE UPON SANATHANA DHARMAM.
2. THE NONSENSE COMMENDY ALLIANCE ARE NOT THE AUTHORITY ON SANATHA DHARMAM.
3. DK, DMK. AIADMKA AND ALL NONSENSE POLITICIANS BEWARE YOU WILL BE AUTOMATICALLY WASHED OUT SOON.
4. COMMUNISTS AND CONGRESS ARE THE ENEMY TO MANKIND DESTROY THEM.
5.ALL SANATHANA DHARMAM FOLLOWERS (WHICH EVER YOUR POLITICAL INTEREST BE: YOUR POLITICAL MINDSET) TAKE AN OATH THAT YOU STAND AGAINST ALL EVIL MINDSET AGAINST SANATHANA DHARMAM!!!
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######6. CRUSH THE ANTI NATIONAL ELEMENTS SUCH AS CONGRESS, COMMUNISTS, LEFT LIBERALS, URBAN NAXALS, TAMILNADU REGIONAL ANTI NATIONAL CUM ANTI SOCIAL POLITICAL PARTIES (DK, DMK, AIADMK, ALL SILLY SELF-APPOINTED CASTE GROUPS), NEVER ALLOW THESE BUGGERS RAISE THER VOICE/HEADS. CRUSH THEM UNDER YOUR FEET.
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JAI HIND
JAI BHARATHAM
VANDHE MADHARAM
BHARAT MATHA KI JAI.
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